सड़क किनारे नवजात का अंतिम संस्कार, सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

सड़क किनारे नवजात का अंतिम संस्कार, सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल !

अस्पताल की कथित लापरवाही से गई जान, भारतीय मानव अधिकार संगठन ने मांगी निष्पक्ष जांच
सीहोर।
सीहोर जिले के भेरुन्दा क्षेत्र से सामने आई एक हृदयविदारक घटना ने समाज और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों को झकझोर कर रख दिया है। सरकारी अस्पताल में जन्म के कुछ ही समय बाद एक नवजात बालिका की मृत्यु हो गई। इसके बाद परिजनों को मजबूरीवश सड़क किनारे उसका अंतिम संस्कार करना पड़ा, जिसने मानवीय संवेदनाओं पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

परिजनों के अनुसार भेरुन्दा निवासी संतोष जाट की पत्नी को प्रसव के लिए सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन की कथित लापरवाही के चलते नवजात शिशु की जान चली गई। आर्थिक व सामाजिक मजबूरियों के कारण शिशु का अंतिम संस्कार सड़क किनारे किया गया, जिसकी तस्वीरें सामने आने के बाद मामला और भी संवेदनशील हो गया।
मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध जांच की मांग की है। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में अस्पताल प्रबंधन या किसी अधिकारी-कर्मचारी की लापरवाही सिद्ध होती है, तो उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह यादव ने कहा कि नवजात शिशु की मृत्यु ने पूरे समाज को झकझोर दिया है। यदि अस्पताल की लापरवाही साबित होती है तो दोषियों को कड़ा दंड मिलना चाहिए, लेकिन दुख की घड़ी में भी इंसानियत को जीवित रखना आवश्यक है। विरोध और न्याय की मांग संवैधानिक एवं सभ्य तरीकों से की जानी चाहिए।
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में किसी मासूम शिशु के शव के साथ अमानवीय व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। न्याय की लड़ाई धरना, ज्ञापन, कानूनी प्रक्रिया और मीडिया के माध्यम से लड़ी जानी चाहिए।
ट्रस्ट ने प्रशासन से पूरे मामले में त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई करते हुए पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है।
यह जानकारी भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट के प्रदेश मीडिया प्रभारी श्री भावेश नाहर द्वारा दी गई।

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